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सोमवार, 29 अप्रैल 2019

सुरों के सहारे - सर्वेश्वरदयाल सक्सेना

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दूर दूर तक 
सोयी पड़ी थीं पहाड़ियाँ 
अचानक टीले करवट बदलने लगे 
जैसे नींद में उठ चलने लगे।
एक अदृश्य विराट हाथ बादलों-सा बढ़ा 
पत्थरों को निचोड़ने लगा
निर्झर फूट पड़े 
फिर घूम कर सबकुछ रेगिस्तान में बदल गया

शांत धरती से 
अचानक आकाश चूमते 
धूल भरे बवंडर उठे 
फिर रंगीन किरणों में बदल 
धरती पर बरस कर शांत हो गए।

तभी किसी
बांस के वन में आग लग गई
पीली लपटें उठने लगीं 
फिर धीरे-धीरे हरी होकर
पत्तियों से लिपट गईं।
पूरा वन असंख्य बाँसुरियों में बज उठा
पत्तियाँ नाच-नाच कर 
पेड़ों से अलग हो 
हरे तोते बन उड़ गईं।

लेकिन भीतर कहीं बहुत गहरे 
शाखों में फँसा
बेचैन छटपटाता रहा 
एक बारहसिंहा

सारा जंगल काँपता हिलता रहा
लो वह मुक्त हो 
चौकड़ी भरता 
शून्य में विलीन हो गया 
जो धमनियों से 
अनंत तक फैला हुआ है।
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- सर्वेश्वरदयाल सक्सेना


शनिवार, 30 मार्च 2019

सर्वेश्वरदयाल सक्सेना की दो कविताएँ

अभिवादन स्वीकार करे 
सादर 

काव्य-धरा में आज विशेष तरह की प्रस्तुती 
उम्मीद हैं पसंद आयेगा आपको 

Image result for उठ मेरी बेटी सुबह हो गई / सर्वेश्वरदयाल सक्सेना
पेड़ों के झुनझुने,
बजने लगे;
लुढ़कती आ रही है
सूरज की लाल गेंद।
उठ मेरी बेटी सुबह हो गई।

तूने जो छोड़े थे,
गैस के गुब्बारे,
तारे अब दिखाई नहीं देते,
(जाने कितने ऊपर चले गए)
चांद देख, अब गिरा, अब गिरा,
उठ मेरी बेटी सुबह हो गई।

लाउडस्पीकरों की होड़
हर गाना पहले से ज़्यादा ‘मस्त’ है
बीट ऐसी कि कुर्सी भी खड़ी हो के नाचने लगे
भीड़ के महासागर मुंबई में


प्रस्तुतकर्त्ता - रवीन्द्र भारद्वाज

सोमवार, 31 दिसंबर 2018

नए साल की शुभकामनाएं ! -सर्वेश्वरदयाल सक्सेना

गूगल से साभार 

नए साल की शुभकामनाएँ!
खेतों की मेड़ों पर धूल भरे पाँव को
कुहरे में लिपटे उस छोटे से गाँव को
नए साल की शुभकामनाएं! 

जाँते के गीतों को बैलों की चाल को
करघे को कोल्हू को मछुओं के जाल को
नए साल की शुभकामनाएँ!

इस पकती रोटी को बच्चों के शोर को
चौंके की गुनगुन को चूल्हे की भोर को
नए साल की शुभकामनाएँ!

वीराने जंगल को तारों को रात को
ठंडी दो बंदूकों में घर की बात को
नए साल की शुभकामनाएँ!

इस चलती आँधी में हर बिखरे बाल को
सिगरेट की लाशों पर फूलों से ख़याल को
नए साल की शुभकामनाएँ!

कोट के गुलाब और जूड़े के फूल को
हर नन्ही याद को हर छोटी भूल को
नए साल की शुभकामनाएँ!

उनको जिनने चुन-चुनकर ग्रीटिंग कार्ड लिखे
उनको जो अपने गमले में चुपचाप दिखे
नए साल की शुभकामनाएँ!
-सर्वेश्वरदयाल सक्सेना