काव्य-धरा

शनिवार, 29 जून 2019

बातें - नागार्जुन

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बातें– हँसी में धुली हुईं सौजन्य चंदन में बसी हुई बातें– चितवन में घुली हुईं व्यंग्य-बंधन में कसी हुईं बातें– उसाँस में झु...
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मंगलवार, 25 जून 2019

कविता - नीलम सिंह

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शब्दों के जोड़-तोड़ से  गणित की तरह  हल की जा रही है जो  वह कविता नहीं है  अपनी सामर्थ्य से दूना  बोझ उठाते-उठाते  चटख गई ...
सोमवार, 24 जून 2019

उन्माद के खिलाफ़ - प्रयाग शुक्ल

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उन्माद कभी ज्यादा देर तक नहीं ठहरता, यही है लक्षण उन्माद का । बीजों में, पेड़ों में, पत्तों में नहीं होता उन्माद आँधी में होता...
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शुक्रवार, 21 जून 2019

निविद - गीत चतुर्वेदी

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हमने साथ चलना शुरू किया था हमने साथ रहना शुरू किया था  धीरे-धीरे मैं अलग होता चला गया  एक कमरा मैंने ऐसा बना लिया है  जहाँ अब कि...
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गुरुवार, 20 जून 2019

वो तो मुद्दत से जानता है मुझे - बेकल उत्साही

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वो तो मुद्दत से जानता है मुझे फिर भी हर इक से पूछता है मुझे रात तनहाइयों के आंगन में चांद तारों से झाँकता है मुझे सुब्‌ह अख़...
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बुधवार, 19 जून 2019

ये शब्द वही हैं - कुंवर नारायण

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यह जगह वही है जहां कभी मैंने जन्म लिया होगा इस जन्म से पहले यह मौसम वही है जिसमें कभी मैंने प्यार किया होगा इस प्यार से पहले...
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रविवार, 16 जून 2019

राधाजी को लागे बिंद्रावनमें नीको - मीराबाई

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राधाजी को लागे बिंद्रावनमें नीको॥ध्रु०॥ ब्रिंदाबनमें तुलसीको वडलो जाको पानचरीको॥ रा०॥१॥ ब्रिंदावनमें धेनु बहोत है भोजन दूध दहींको॥...
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रवीन्द्र भारद्वाज
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